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आरोही क्रम में बढ़ती रही BJP तो अवरोही क्रम में घटती रही कांग्रेस

थोड़ा-बहुत भी गणित जानने वाले हेडिंग में दिए गए आरोही और अवरोही शब्‍दों से परिचित होंगे. आरोही क्रम यानी बढ़ते क्रम में और अवरोही यानी घटते क्रम में. 2020 में बीजेपी लगातार बढ़ती रही, वहां भी बढ़ी, जहां वह थी ही नहीं लेकिन कांग्रेस का दायरा और सिकुड़ गया. मध्‍य प्रदेश उसके हाथ से निकल गया राजस्‍थान निकलते-निकलते बचा. पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में 'आपदा में अवसर' का आह्वान किया था. इस आह्वान का सबसे अधिक किसी ने पालन किया तो वह बीजेपी है. बीजेपी ने पीएम नरेंद्र मोदी के इस आह्वान को सूत्र वाक्‍य बना लिया और वो कर दिखाया, जो कभी बीजेपी सोचने की भी हिम्‍मत नहीं कर पाती थी.  कोरोना महामारी के चलते जहां दुनिया के बड़े से बड़े धुरंधर राजनीतिज्ञों की साख को बड़ा धक्‍का लगा, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी और प्रभावी होते चले गए. पीएम नरेंद्र मोदी की अपील पर देश भर के लोगों ने कोरोना के खिलाफ प्रतीकात्‍मक ऊर्जा से लैस होने के लिए थाली बजाई, दीप जलाए. कांग्रेस ने इन सब बातों का मजाक उड़ाया और खुद ही मजाक बन गई.  हालांकि बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा के लिए 2020 की शुरुआत अच्छी नहीं रही, क्‍य...

पीएम नरेंद्र मोदी का शत्रुहंता योग

क्‍या आपने गौर किया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जो भी टकराया, वो चूर-चूर हो गया. सबसे पहले भाजपा नेता संजय जोशी ने गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी से लोहा लिया था और आज वे कहां हैं, शायद ही किसी को पता हो. बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार बनने और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी पार्टी के कई नेताओं ने नरेंद्र मोदी से टक्‍कर ली थी, उनका भी हश्र आप देख लीजिए. ऐसे नेताओं की फेहरिस्‍त लंबी है. चाहे यशवंत सिन्‍हा हों, शत्रुघ्‍न सिन्‍हा हों, अरुण शौरी  या फिर नवजोत सिंह सिद्धू, जिसने भी नरेंद्र मोदी के वर्चस्‍व को चुनौती दी, वे आज राजनीतिक रूप से हाशिए पर हैं. ऐसा इसलिए है, क्‍योंकि पीएम नरेंद्र मोदी की कुंडली में शत्रुहंता योग बहुत प्रबल है. उनके सामने कोई विरोधी नहीं टिक सकता, भले ही वह कितना ही मजबूत क्‍यों न हो.  पिछले 6 साल में ऐसी 10 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला जलाने वाले खुद जल गए. कहने में यह भले ही अतिश्‍योक्‍ति लगेगी, लेकिन अगर ऐसी एक-दो घटनाएं होतीं तो यह सामान्‍य बात होती. कहने का मतलब यह है कि पीएम मोदी का पु...

होश उड़ाने वाला खुलासा- कश्‍मीर में एर्दोगन के 'किलिंग मशीन' से कैसे निपटेगी मोदी सरकार?

इस्‍लामिक देशों का मसीहा बनने की सनक में तुर्की का राष्‍ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) अब भारत खासकर कश्‍मीर को तबाह करने के प्‍लान के साथ दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा भंग करने पर तुला हुआ है. एर्दोगन कश्‍मीर को लेकर ऐसा प्‍लान बना रहा है, जिसे सुनकर भारतीय एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. दरअसल, अजरबैजान-आर्मीनिया के बीच लड़ाई में तुर्की ने अजरबैजान का साथ दिया था और आर्मीनिया को बुरी तरह शिकस्‍त का सामना करना पड़ा. ऐसे में तुर्की के हौसले बुलंद हैं और अब एर्दोगन अपनी सनक को कश्‍मीर पर फोकस करने के मूड में है. अनुच्‍छेद 370 को हटाने के मसले पर भी तुर्की ने पाकिस्‍तान का साथ दिया था और वह आगे भी पाकिस्‍तान के लिए कश्‍मीर को तबाह करने की व्‍यूह रचना के साथ आगे बढ़ सकता है. दरअसल, ग्रीस (Greece) के जाने-माने पत्रकार एंड्रियास माउंटजौरौली ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान की सहायता के लिए एर्दोगन सीरिया के विद्रोही आतंकियों को कश्मीर में भेजने की योजना पर काम कर रहा है. तुर्की के अफसरों ने इसके लिए कई आतंकी गुटों से बात भी की है. न्यूज वेबसाइट Pentapostag...

Nagrota Encounter : चूहे की तरह बिल से निकले और कुत्‍ते की तरह मार गिराये गए आतंकी

सुरक्षाबलों ने जम्‍मू-कश्‍मीर के सांबा सेक्‍टर में टेरर टनल (सुरंग) का खुलासा किया है. माना जा रहा है कि नगरोटा में मारे गए आतंकी इसी टनल के रास्‍ते भारत में घुसे थे. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आतंकी घुसे तो थे चूहे के रूप में और मारे गए कुत्‍ते की तरह. यह टनल 150 मीटर लंबा बताया जा रहा है और इसका दूसरा पाकिस्‍तान में खुल रहा है. नगरोटा एनकाउंटर के 72 घंटे के अंदर ही सुरक्षाबलों ने आतंकियों की एंट्री प्‍वाइंट ढूंढ निकाली है, जिसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि अनुच्‍छे 370 के समाप्‍त होने के बाद पाकिस्‍तान अब आतंकियों को हथियार सप्‍लाई नहीं कर पा रहा है और सुरक्षाबलों ने पाकिस्‍तान और आतंकियों के बीच के चेन पर कड़ा प्रहार कर उसे नष्‍ट कर दिया है. कोई और रास्‍ता न देख पाकिस्‍तान ने सुरंग वाली साजिश रची है. इससे पहले भी बीएसएफ के जवानों ने कई सुरंग का पर्दाफाश किया था. नगरोटा एनकाउंटर को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने हाई लेवल मीटिंग की थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, विदेश सचिव और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए थे. प...

तेजस्‍वी यादव का PK कौन? जिसने उड़ा दी है नीतीश कुमार की नींद

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) जैसे दिग्‍गज राजनेताओं से लोहा लेते हुए राजद नेता और महागठबंधन से मुख्‍यमंत्री पद के दावेदार तेजस्‍वी यादव (Tejaswi Yadav) जिस तरह सधी हुई राजनीति कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि उन्‍हें उनका PK मिल गया है. PK यानी प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जो पिछले चुनाव में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की चुनावी रणनीति बना रहे थे. इस बार बिहार चुनाव से PK नदारद हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि तेजस्‍वी यादव का PK कौन है? कौन है जो चुनावी राजनीति की बिसात पर तेजस्‍वी से सधी हुई चाल चलने को कह रहा है. कहीं यह खुद PK तो नहीं, PK नहीं तो मनोज झा (Manoj Jha) तो नहीं. मनोज झा इसलिए कि तेजस्‍वी यादव मनोज झा का बहुत सम्‍मान करते हैं और तेजस्‍वी यादव ने जब 10 लाख नौकरियां देने की बात कही थी तो मनोज झा की उसमें प्रमुख भूमिका बताई जाती है. 10 लाख नौकरियां देने के वादे के साथ ही तेजस्‍वी यादव ने रोजगार को बिहार में चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना दिया है, जिस पर NDA के नेता बगलें झांकने को मजबूर हो रहे हैं. बिहार चुनाव में पीए...

बिहार के CM तो नीतीश कुमार ही होंगे!

1995 में जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश की समता पार्टी चुनाव लड़ती हैऔर लगभग पूरा सफाया हो जाता है . फिर भाजपा से गठबंधन करते हैं और सीनियर पार्टनर और मुख्यमंत्री के दावेदार बनते हैं. नीतीश की जदयू 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ती है. पूरी तरह खारिज हो जाती है. फिर लालू से गंठबंधन करते हैं. सीनियर पार्टनर और मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनते हैं. महागठबंधन में सरकार चलाने से उनकी छवि पर छींटें पड़ते हैं और वे इन छींटों से बचने के लिए धुर विरोधी नरेंद्र मोदी की भाजपा की गोद में जा बैठते हैं. बिहार में चुनाव की दो धुरी भाजपा और लालू ही हैं लेकिन सरदार नीतीश बनते हैं. बिना जनाधार वाला सरदार. लोग रामविलास को मौकापरस्ती से जोड़ते हैं. सफल मौकपरस्ती के लिए दो बातों का होना जरूरी है. समय देखकर आप किसी से भी जुड़ जायें और आपको हर कोई खुद से जोड़ ले. नीतीश समय-समय पर सबसे जुड़े और समय-समय पर हर कोई उन्हें खुद से जोड़ने को तैयार रहता है लेकिन उन पर मौकापरस्त का टैग नहीं लगा. इसे घाघ राजनीतिज्ञ होना कहते हैं. बिना जनाधार वाला घाघ सरदार. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) में बीजेपी और रा...

चिंता जताने के साथ संयुक्‍त राष्‍ट्र को चेतावनी दे रहे थे पीएम नरेंद्र मोदी

'भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के रिफॉर्म्स को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. आज भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या यह प्रोसेस लॉजिकल एंड पर पहुंच पाएगा. आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर (Decision Making Structure) से अलग रखा जाएगा? एक ऐसा देश जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां विश्व की 18% से ज्यादा जनसंख्या रहती है, जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अनेकों पंथ हैं, अनेकों विचारधाराएं हैं. जिस देश ने सैकड़ों वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) का नेतृत्व करने और सैकड़ों वर्षों तक गुलामी दोनों को झेला है.' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 26 सितंबर की शाम को (भारतीय समयानुसार) जब संयुक्‍त राष्‍ट्र की जनरल एसेंबली (UNGA) को संबोधित कर रहे थे, तो उनकी मुद्रा अलग थी. वो संयुक्‍त राष्‍ट्र के रिफॉर्म्‍स (United Nation Reforms) को लेकर गुहार नहीं कर रहे थे, बल्‍कि चेतावनी दे रहे थे. वैसे इंटरनेशनल प्‍लेटफॉर्म पर पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) कभी गुहार की मुद्रा में नहीं रहते. वह खुद ही कहते हैं, न ह...