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अप्रैल 3, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं शराब हूं

शबाब पर कोई प्रतिबंध नहीं है, कबाब पर कोई मनाही नहीं है लेकिन मुझसे सभी को नफरत रहती है। जबकि मेरे नाम कई विशिष्‍ट टाइप के तमगे जुड़े हैं। देवताओं की महफिल में भी परोसा गया मैं और राक्षसों की भोज में भी पर बदनाम ही रहा हूं मैं। अमृत पिलाने के बदले भगवान विष्‍णु ने मोहिनी रूप धारण कर मुझे उनके हलक में उतार दिया। व्‍हाइट हाउस की पार्टी की शान हूं मैं पर बिहार, गुजरात जैसे राज्‍यों के लिए बेकार हूं मैं। कैसे अपनी बदतमीजी मेरे ऊपर मढ़ दी जाती है और मैं कुछ कुछ नहीं कर पाता। मुझ पर लिखी कविता मधुशाला बन जाती है और मैं...। क्‍या करूं मैं?  व्‍हाइट हाउस, क्रेमलिन और 10 डाउनिंग स्‍ट्रीट की दावत मेरे बिना अधूरी रहती है और इस देश के लोगों की नादानी तो देखो, मुझ पर प्रतिबंध लगाने की होड़ सी मची है। हरिवंश राय बच्‍चन साहब ने लिखा है - 'बैर कराते मंदिर मसजिद, मेल कराती मधुशाला' । अगर मैं इतना ही बुरा हूं तो इतने बड़े कवि और साहित्‍यकार ने मेरे बारे में इतनी ऊंची सोच कैसे रखी? गुजरात में मैं पहले से बैन हूँ और अब उसी लीक पर चलते हुए सुशासन बाबू नीतीश कुमार ने भी वहीं काम किया है। बं...