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सितंबर 30, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

महागठबंधन की बलि बेदी पर कुर्बान होगी कांग्रेस

महागठबंधन तो होगा, चाहे कुर्बानी किसी को देनी पड़े। फिलहाल कुर्बानी कांग्रेस को ही देनी होगी, क्योंकि क्षेत्रीय दल अपने हिस्से में से शायद ही कटौती करें। महागठबंधन की सबसे ज्यादा जरूरत भी कांग्रेस को ही है। उस दल का, जिसका कभी जम्मू कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और गुजरात से लेकर मिजोरम तक एकाधिकार हुआ करता था, वह अब पंजाब और पुड्डुचेरी तक सिमट कर रह गई है। यही उसकी छटपटाहट है और यही सबसे बड़ी कमजोरी। यही कारण है कि सभी क्षेत्रीय दल उसे आंख दिखा रहे हैं। कांग्रेस किसी तरह 2019 का चुनाव जीतना चाहेगी, क्योंकि यह राहुल गांधी के लिए बतौर अध्यक्ष पहला आम चुनाव होगा और जीत ही उन्हें स्थापित करेगी। हालांकि हार से उनकी अध्यक्षी को आंच नहीं आएगी पर संभव है कि पंजाब जैसे राज्य की सत्ता भी हाथ से निकल जाए। कांग्रेस की एक छटपटाहट यह भी है कि मोदी सरकार में उसे सम्मानित विपक्ष का भी दर्जा हासिल नहीं हुआ। इसलिए कांग्रेस को महागठबंधन का जहर कबूल होगा, पर मोदी शासन का हलाहल कदापि मंजूर नहीं। कांग्रेस जानती है कि मोदी सरकार का बने रहना उसके अस्तित्व के लिए बहुत बड़ा खतरा है, इसलिए वह कोई भी जोखिम उठाने को तैय...