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सितंबर 4, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुम मुझे #Vote दो, मैं तुम्‍हें मोबाइल दूंगा

शीर्षक का राग तो नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने दिया था। यहां चुनावी राजनीति के लिहाज से शब्‍दों का हेरफेर किया गया है। शायद नेताजी आज के समय में चुनाव लड़ रहे होते तो उन्‍हें भी इसी तरह का लोकलुभाव नारा देना पड़ता। चलिए नेताजी नहीं हैं लेकिन एक दूसरे नेताजी के सुपुत्र और उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने यह नारा देकर युवाओं में खास संदेश देने की कोशिश तो की ही है। चुनावी राजनीति में लेनदेन के वादे का यह खेल कांग्रेस ने शुरू किया था। आजादी के बाद से कांग्रेस उत्‍तरोत्‍तर अपनी सत्‍ता गंवाती रही और एक से  एक लोकलुभावन नारे देती रही लेकिन वादों पर अमल दूसरी पार्टिंयों के भरोसे छोड़ती गईं। इसी कारण नए-नए छोटे-छोटे राजनीतिक समूह उभरे और बाद में मजबूत होते गए। एक तरह से देखा जाए तो कांग्रेस के वादे सैद़धांतिक ही रह गए, जबकि बाद में उभरीं पार्टियां इस मामले में भौतिकवादी साबित हुईं। 70 के दशक से कांग्रेस लगातार अपनी जमीन खोती गई और क्षेत्रीय क्षत्रप उसे हथियाते गए। इस गंवाने और हथियाने के पीछे के कारणों पर प्रकाश डालें तो एक बड़ा कारण वादों का सैद़धांतिक और भौतिक होना भी है। कांग्रेस ने कभ...