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दिसंबर 6, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रफ्तार भी कोई चीज है

रफ्तार के बाजार में हमने कितनी लेट एंट्री मारी है? ऐसे लग रहा है जैसे आधा से अधिक सिलेबस खत्म होने के बाद किसी छात्र ने क्लास में एडमिशन लिया है। हम खुद को 21वीं सदी का देश मान रहे हैं, पूरे विश्व का नेतृत्व करने का दंभ भर रहे हैं। अमेरिका, चीन और जापान को पीछे छोड़ने की बात कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन के सामने खड़े होने को बेकरार हैं लेकिन.....। यह लेकिन बहुत बड़ा लेकिन है। क्या हम अमेरिका और बाकी देशों के बराबर खड़े भी हो पाए हैं। क्या विश्व हमें अपना नेता केवल इसलिए मान ले कि हमारे यहां कभी कोहिनूर था और हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। या केवल इस बात के लिए विश्व हमें नमन करे कि यहां कभी नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय होते थे। क्या हम इसलिए सरदार हो गए हैं कि हमारे पास विश्व की दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या है। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो गलत हैं। हम ऐसा तभी कर पाएंगे जब हम उनकी बराबरी करेंगे, विकास करेंगे। हमारा रहन-सहन भी विश्वस्तरीय होना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हम नाहक मूंगेरीलाल के हसीन सपने देखते रहेंगे। ...

मुसलमान बुद्धिजीवी ही मुस्लिमों के सबसे बड़े दुश्मन

ये बात हम क्यों कह रहे हैं? इसको समझना होगा। किसी भी मुस्लिम बुद्धिजीवी से बात करो तो वो कौम की बात पहले करता है, समाज या व्यक्ति विशेष की बात बाद में। मुस्लिमों में यह बात भर दी गयी है कि कौम की तरक्की में ही उनकी तरक्की है। कोई मुस्लिम बुद्धिजीवी यह बात कहने का साहस नहीं करता कि व्यक्ति की तरक्की में समाज की तरक्की है और समाज की तरक्की में देश की तरक्की है। कौम की तरक्की की बात करने से चंद कठमुल्ले फायदा उठा ले जाते हैं और आम मुसलमान इसी बात से खुश हो जाता है कि उसके कौम की तरक्की की बात हो रही है। उसे तनिक भी भान नहीं होता कि वह ठग लिया गया। टीवी पर भी मुसलमानों के मसाइल पर किसी प्रोफेसर या समाजशास्त्री को चर्चा के लिए नहीं बुलाया जाता। वहां पर भी कठमुल्लों का सिक्का चलता है। मुसलमानों से बाहर की दुनिया भी मानकर चलती है कि कठमुल्ले ही मुस्लिम मसाइल पर बेहतर चर्चा कर सकते हैं। जाहिर है कोई विद्वान वो बात नहीं कर पायेगा जो कठमुल्ला कर सकता है और धर्म के नाम पर बरगला सकता है। इसी कारण सीरिया, यमन, फलिस्तीन आदि देशों में हुई घटनाएं अपने यहाँ स्वाभाविक रूप से सुर्खियां बन जाती है...

....क्योंकि हम देश के लिए खाते हैं

हम कांग्रेस के लोग कांग्रेस को सत्यनिष्ठा से बिना किसी लाग-लपेट और स्वार्थ के संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न और कानून से ऊपर, गांधी परिवार की बपौती पार्टी मानते हैं और श्रीमती सोनिया गांधी को न सिर्फ पार्टी बल्कि देश की राजमाता और श्रीमान राहुल गांधी को युवराज घोषित करते हैं तथा यह भी तय करते हैं कि इन दोनों पर किसी तरह की क़ानूनी कार्यवाई होने पर हम देश भर विरोध प्रदर्शन करेंगे और संसद की कार्यवाही को बाधित कर देंगे, क्योंकि हम इनदोनो को कानून से ऊपर मानते हैं। हम एतद् द्वारा इस प्रस्तावना को अंगीकृत, अधिष्ठापित और आत्मार्पित करते हैं। हम कांग्रेस के लोग सर्वसम्मति से इसी प्रस्तावना को मूल आधार मानते हैं। यह प्रस्तावना पार्टी को एक सूत्र में बांधती है। हमारी पार्टी में राजमाता या युवराज के खिलाफ बोलना राजनितिक आत्महत्या माना जाता है। विडम्बना की बात है कि देश की सबसे पुराणी पार्टी और स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका होने पर भी आज कांग्रेस के बारे में उल्टा सीधा कहा जा रहा है। आजादी की खुमारी इतनी जल्दी उतार जायेगी ये तो हम कांग्रेसियों ने सोचा ही नहीं था। मजाक था क्या एओ ह्यूम की प...