सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Ear Biography लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कान की आत्मकथा

मैं कान हूँ. हम दो हैं. दोनों जुड़वां भाई लेकिन हमारी किस्मत ही ऐसी है कि आज तक हमने एक दूसरे को देखा तक नहीं पता नहीं..  कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है . दु:ख सिर्फ इतना ही नहीं है...   हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है गालियाँ हों या तालियाँ. अच्छा हो या बुरा. सब  हम ही सुनते हैं. धीरे धीरे हमें खूंटी समझा जाने लगा. चश्मे का बोझ डाला गया, फ्रेम की डण्डी को हम पर फँसाया गया... ये दर्द सहा हमने... क्यों भाई..??? चश्मे का मामला आंखो का है तो हमें बीच में घसीटने का मतलब क्या है...??? हम बोलते नहीं  तो क्या हुआ,  सुनते तो हैं ना... हर जगह बोलने वाले ही क्यों आगे रहते है....??? बचपन में पढ़ाई में  किसी का दिमाग काम न करे तो मास्टर जी हमें ही मरोड़ते हैं. जवान हुए तो आदमी, औरतें सबने सुन्दर सुन्दर लौंग, बालियाँ, झुमके आदि बनवाकर हम पर ही लटकाये...!!  छेदन हमारा हुआ, और तारीफ चेहरे की. और तो और... श्रृंगार देखो...  आँखों के लिए काजल. मुँह के लिए क्रीमें. होठों के लिए लिपस्टिक. हमने आज तक कुछ माँगा हो तो बताओ. कभी कि...