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जनवरी 3, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्‍या दादरी का जवाब है मालदा तो पठानकोट का क्‍या?

पठानकोट की दहशत, मालदा में उत्पात और पूर्णिया में उपद्रव के बाद क्या? दहशत का यह ‘कारवां’ क्या ऐसे ही थम जाएगा, कदापि नहीं। दहशत की दुकान ऐसे बंद नहीं होती। कुछ और शहर तय कर लिए गए होंगे। लिस्ट बहुत लंबी है। यह अलग बात है कि घटना होने के बाद ही हमें और आपको पता चलेगा। किस शहर का नाम आगे है और किसका पीछे, यह शहर के दुर्भाग्य पर निर्भर करता है। मन अशांत है, लोग शांत हैं। एके हंगल साहब होते तो पूछते- इतना सन्नाटा क्यों पसरा है भाई? अब वे नहीं हैं तो चलो मैं ही पूछ लेता हूं। कैसी विचाराग्नि है? घटना को चुन-चुनकर धधकती है। सोशल साइट पर पक्ष और विपक्ष है। तीसरा पक्ष गायब है। अजीब तरह का माहौल हो गया है। पठानकोट के समय मुंबई हमले की छुई-अनछुई बातों को बेपर्दा किया जा रहा है। मालदा की तुलना दादरी की घटना से हो रही है। फोटोशॉप का खूब प्रयोग हो रहा है और एकदम से विश्वास किया जाने वाला झूठ पैदा किया जा रहा है। आप समझ रहे हैं कि यह सतही और उच्छृंखल लोग ही कर रहे हैं लेकिन आप गलत हैं। बड़े लोग खासकर उच्च पदों पर आसीन वर्ग के लोग ऐसा कर रहे हैं। बड़े-बड़े पत्रकार इस पेशे में लग गए हैं। ऐसा सिर्फ एक...

लखनऊ मेट्रो में जॉब चाहते हैं तो......

लखनऊ मेट्रो में सैकड़ों रिक्तियां। आपको मिल सकता है मौका। ये अवसर हाथ से न जाने दें। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (LUCKNOW METRO RAIL CORPORATION - LMRC) ने स्टेशन कंट्रोलर/ ट्रेन ऑपरेटर, कस्टमर रिलेशन, असिस्टेँट, जूनियर इंजीनियर, ऑफिस असिस्टेँट, अकाउंट असिस्टेँट, मैँटेनर, असिस्टेँट मैनेजर फाइनेँस की भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदन की LAST Date - एक  फरवरी 2016 1. स्टेशन कंट्रोलर/ ट्रेन ऑपरेटर पद :  97 वेतनमान :  13500- 25520 रुपए शैक्षिक योग्यता :  इलेक्ट्रॉनिक्स/ इलेक्ट्रिकल में तीन साल का इंजीनियरिंग डिप्लोमा या फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ बीएससी 2. कस्टमर रिलेशन असिस्टेंट (CRA) पद  :  26 वेतनमान :  10170- 18500 रुपए शैक्षिक योग्यता :  किसी भी संकाय से ग्रैजुएट और कम्प्यूटर में सर्टिफिकेट 3. जूनियर इंजीनियर पद  :  70 वेतनमान :  13500-25520 रुपए शैक्षिक योग्यता :  इलेक्ट्रिकल/ इलेक्ट्रॉनिक्स/ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन/ मेकैनिकल/ सिविल ब्रांच या इसके समकक्ष तीन साल का इंजीनियरिंग में डिप्ल...

परदे के पीछे क्यों रह गया मालदा?

नए साल के पहले हफ्ते में ही हुईं दो बड़ी घटनाओं से देश दहल गया। एक तरफ पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों ने हमला कर दिया तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मालदा शहर में हज़ारों की भीड़ ने प्रदर्शन करने के बाद आतंक मचाना शुरू कर दिया। थाने में आग लगा दी गयी। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। जो सामने मिला उसे लतियाया जुतियाया गया। एक तरफ पठानकोट एयरबेस पर हमले को 24×7 कवरेज दिया जा रहा था। जो नहीं दिखाना चाहिए था वो भी दिखाया जा रहा था। जो नहीं बताना चाहिए वो भी बताया जा रहा था। दूसरी ओर मालदा की घटना से देश अनजान था क्योंकि मीडिया वाले उस घटना को पचा गए। उस खबर को पी गए। अब सवाल उठता है कि देश के लिए बड़ा खतरा कौन है? प्रतीकात्मक नजरिये से देखेंगे तो पठानकोट एयरबेस पर हमला बड़ा है लेकिन खतरे के नजरिये से देखें तो दोनों घटनाओं के चरित्र में कोई खास फर्क नहीं है। दोनों ही घटनाएं देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाली थीं। दोनों ही घटनाओं का उद्देश्य दहशत का खेल खेलना ही था। आतंकवाद की शिकायत तो पाकिस्तान, अमेरिका, चीन, रूस या यूएन से कर लेंगे लेकिन देश के अंदर जो धार्मिक ज्वार उमड़ रहा है, उसका क्य...