सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अक्टूबर 25, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बुरा न मानो दिवाली है

मोदी सरकार की असहिष्णु नीतियों के विरोध में देश से लेकर विदेशों तक में आवाजें उठाई जा रही हैं। भारत में तो आधे से भी अधिक साहित्यकारों ने अपने-अपने पुरस्कार लौटा दिए हैं। फिल्मकारों और अब वैज्ञानिकों ने भी पुरस्कार लौटाने की महत्ती रस्म निभाने की कवायद शुरू कर दी है। शायर मुनव्वर राना ने पुरस्कार तो लौटा दिया पर प्रधानमंत्री कार्यालय से एक बार बुलावा आ गया तो जूता सिर पर रखने की बात करने लगे। जाहिर है पुरस्कार वे इसलिए लौटा रहे थे कि इतने बड़े शायर होने के बाद भी प्रधानमंत्री कार्यालय से बुलावा नहीं आ रहा था। बेचारे कसमसा रहे हैं कि अब कौन सा मुंह लेकर प्रधानमंत्री के सामने जाएं। लिहाजा क्षतिपूर्ति करने के लिए जूता उठाने की बात कहते फिर रहे हैं। दूसरे लोग इसलिए अभी तक नाराज हैं कि सिर्फ मुनव्वर को ही बुलावा क्यों आया, हमें क्यों नहीं आया? मुनव्वर तो जूता उठाता, हम तो बहुत कुछ उठा सकते थे। हम जो उठाते तो मुनव्वर भी शरमा जाते। वसुधैव कुटुंबकम के जमाने में इस बात की चर्चा और इसका प्रभाव अब विदेशों में पड़ने लगा है। देश का मोस्ट वांटेड दाउद इब्राहिम ने साहित्यकारों, फिल्मकारों और वैज्ञा...

प्रवासी बिहारियों पर दारोमदार

बिहार में दशहरा के बाद जो चुनाव का चरण शुरू होने जा रहा है, वो दोनों सियासी धड़ों के लिए महत्वपूर्ण है। भाजपा के लिए इन चरणों में अपना गढ़ बचाने की चुनौती है तो महागठबंधन को  भाजपा के गढ़ में सेंधमारी करने का मौका। इस चरण में महत्वपूर्ण भूमिका उन प्रवासी बिहारियों की होगी,  जो आम तौर पर बिहार से बाहर रहते हैं या रहने को मजबूर हैं क्योंकि घर में उन्हें कोई रोजगार हासिल नहीं है। इसकी टीस आमतौर पर हर बिहारी को रहती है।  आमतौर पर दशहरा के बाद बिहार से बाहर रहने वाले लोग लौटकर दिवाली और छठ पर्व के लिए घर लौटते हैं।   काफी तादाद में घर लौटे मतदाता भी बड़ी उलटफेर कर सकते हैं। प्रवासी बिहारी जिधर अपना वोट डालेंगे, उसका पलड़ा उतना ही मजबूत होगा। आगे के चरणों के चुनाव के लिए दोनों गठबंधनों की नजर प्रवासी बिहारियों पर टिकी है। महाराष्ट्र के भुक्तभोगी : भाजपा प्रवासी बिहारियों को अपना वोटर मानती है पर महाराष्ट्र की सरकार ने वहां ऐसा कानून लागू किया है, जिसके अनुसार वहां ड्राइविंग लाइसेंस उन्हीं को मिलेगा, जो मराठी भाषी हैं। इस कारण लाखों बिहारी वहां प्रभावित हो रहे हैं और उन...