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Nagrota Encounter : चूहे की तरह बिल से निकले और कुत्‍ते की तरह मार गिराये गए आतंकी



सुरक्षाबलों ने जम्‍मू-कश्‍मीर के सांबा सेक्‍टर में टेरर टनल (सुरंग) का खुलासा किया है. माना जा रहा है कि नगरोटा में मारे गए आतंकी इसी टनल के रास्‍ते भारत में घुसे थे. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आतंकी घुसे तो थे चूहे के रूप में और मारे गए कुत्‍ते की तरह. यह टनल 150 मीटर लंबा बताया जा रहा है और इसका दूसरा पाकिस्‍तान में खुल रहा है. नगरोटा एनकाउंटर के 72 घंटे के अंदर ही सुरक्षाबलों ने आतंकियों की एंट्री प्‍वाइंट ढूंढ निकाली है, जिसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि अनुच्‍छे 370 के समाप्‍त होने के बाद पाकिस्‍तान अब आतंकियों को हथियार सप्‍लाई नहीं कर पा रहा है और सुरक्षाबलों ने पाकिस्‍तान और आतंकियों के बीच के चेन पर कड़ा प्रहार कर उसे नष्‍ट कर दिया है. कोई और रास्‍ता न देख पाकिस्‍तान ने सुरंग वाली साजिश रची है. इससे पहले भी बीएसएफ के जवानों ने कई सुरंग का पर्दाफाश किया था.


नगरोटा एनकाउंटर को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने हाई लेवल मीटिंग की थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, विदेश सचिव और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए थे. पीएम नरेंद्र मोदी ने विदेश सचिव से पाकिस्‍तान के हाई कमिश्‍नर को तलब करने का निर्देश दिया था. अगले दिन विदेश मंत्रालय में पाकिस्‍तान के हाई कमिश्‍नर की पेशी भी हुई थी. दरअसल, नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों की मंशा जम्‍मू-कश्‍मीर में चल रहे डीडीसी चुनाव में हिंसा करना था, जिससे जम्‍मू-कश्‍मीर के मामले को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर हाईलाइट किया जा सके. पाकिस्‍तानी हाई कमिश्‍नर को तलब कर भारत की कोशिश अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पाकिस्‍तान के आतंकी चेहरे को और बेनकाब करना था.

नगरोटा के आतंकियों का पाकिस्‍तान से कनेक्‍शन होने के भारत के पास सबूत भी हैं. आतंकियों को पाकिस्‍तान के बहावलपुर में बैठा मौलाना मसूद अजहर का भाई रउफ अजहर लगातार संदेश भेज रहा था और भारतीय सीमा के भीतर के सूरतेहाल के बारे में पूछ रहा था. अब इसमें तो कोई संदेह ही नहीं रह गया है कि नगरोटा के आतंकी पाकिस्‍तान से भेजे गए थे, भले ही पाकिस्‍तान खुद को निरीह और आतंकवाद से पीड़ित साबित करने की कोशिश करे. पाकिस्‍तान ने दिखावे के लिए मुंबई हमले के मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद को सजा सुना दी हो. दरअसल, पाकिस्‍तान यह सब इसलिए कर रहा है, क्‍योंकि फरवरी 2021 में एफएटीएफ (Financial Action Task Force) की बैठक होने वाली है और अभी ग्रे लिस्‍ट में मौजूद पाकिस्‍तान नहीं सुधरा तो उसे ब्‍लैक लिस्‍ट किया जा सकता है. पाकिस्‍तान अगर ब्‍लैकलिस्‍ट हो जाएगा तो एक देश के तौर पर वह तबाह हो जाएगा.

पिछले कई सालों से भारत अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर यह साबित करने की कोशिश में है कि पाकिस्‍तान आतंकवाद को पनाह दे रहा है और आतंकवाद उसकी स्‍टेट पॉलिसी का हिस्‍सा बन गई है. भारत इस कोशिश में काफी हद तक सफल भी हुआ है. अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर पाकिस्‍तान को भारत के खिलाफ मुंह की खानी पड़ी है. चीन, मलेशिया और तुर्की को छोड़ दें तो इस्‍लामिक देशों के संगठन ओआईसी में भी पाकिस्‍तान बेइज्‍जत हो गया. भारत विरोध के नाम पर पाकिस्‍तान इतना आगे बढ़ गया है कि सऊदी अरब का भी विरोध करने लगा और इसका खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ा. सऊदी अरब से सुलह करने की कोशिश करने गए पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से सऊदी सुल्‍तान ने मिलने से भी मना कर दिया और बड़े बेआबरू होकर बाजवा को घरवापसी करनी पड़ी.

दरअसल, धार्मिक आतंकवाद के नाम पर पाकिस्‍तान इतना अंधा हो चुका है कि वह उलजुलूल फैसले भी ले रहा है. हाल ही में पाकिस्‍तानी कैबिनेट की बैठक में फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रो के खिलाफ प्रस्‍ताव पारित किया गया और फ्रांस से राजदूत को वापस बुलाने का प्रस्‍ताव मंजूर कर लिया गया. बाद में पता चला कि फ्रांस में पाकिस्‍तान का कोई राजदूत है ही नहीं. इस फैसले के बाद पाकिस्‍तान की इंटरनेशनल बेइज्‍जती हुई. ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं, जब पाकिस्‍तान अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर बेइज्‍जत हुआ. हालांकि उसकी चमड़ी इतनी मोटी है कि शर्म मगर उसे आती नहीं.

यह भी खबर है कि एलओसी के पार करीब 300 आतंकवादी तैयार रखे गए हैं और उचित मौका मिलते ही आतंकियों को भारत में प्रवेश कराया जाएगा. पाकिस्‍तान इसलिए छटपटा रहा है कि एक तो जम्‍मू-कश्‍मीर में डीडीसी चुनाव होने वाले हैं और अगर आतंकियों की घुसपैठ नहीं हुई तो चुनाव में कोई हिंसा नहीं हो पाएगी और पाकिस्‍तान कुछ कर नहीं पाएगा. दूसरी बात यह है कि अब बर्फबारी का समय आने ही वाला है और बर्फबारी के बाद आतंकियों का भारत में घुसपैठ कराना पाकिस्‍तान के लिए नामुमकिन हो जाएगा. यही उसकी छटपटाहट है और इसलिए वह बार-बार सीजफायर का उल्‍लंघन करता आ रहा है. हालांकि इसका उसे नुकसान भी हो रहा है लेकिन उसे नुकसान की फिक्र ही नहीं है. दरअसल, पाकिस्‍तान को भारत के गृह मंत्री अमित शाह का संसद में दिया वह बयान लगातार कौंध रहा है कि पीओके हमारा है और हम उसे लेकर रहेंगे. चीन से तनातनी के बीच पाकिस्‍तान को उम्‍मीद बंधी थी कि भारत को मुंह की खानी पड़ेगी लेकिन जब चीन के लिए ही दांव उल्‍टा पड़ गया तो पाकिस्‍तान की रही-सही उम्‍मीद भी जाती रही. तो पाकिस्‍तान वहीं करेगा न, खिसियानी बिल्‍ली खंभा नोचे.

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