सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

होश उड़ाने वाला खुलासा- कश्‍मीर में एर्दोगन के 'किलिंग मशीन' से कैसे निपटेगी मोदी सरकार?


इस्‍लामिक देशों का मसीहा बनने की सनक में तुर्की का राष्‍ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) अब भारत खासकर कश्‍मीर को तबाह करने के प्‍लान के साथ दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा भंग करने पर तुला हुआ है. एर्दोगन कश्‍मीर को लेकर ऐसा प्‍लान बना रहा है, जिसे सुनकर भारतीय एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. दरअसल, अजरबैजान-आर्मीनिया के बीच लड़ाई में तुर्की ने अजरबैजान का साथ दिया था और आर्मीनिया को बुरी तरह शिकस्‍त का सामना करना पड़ा. ऐसे में तुर्की के हौसले बुलंद हैं और अब एर्दोगन अपनी सनक को कश्‍मीर पर फोकस करने के मूड में है. अनुच्‍छेद 370 को हटाने के मसले पर भी तुर्की ने पाकिस्‍तान का साथ दिया था और वह आगे भी पाकिस्‍तान के लिए कश्‍मीर को तबाह करने की व्‍यूह रचना के साथ आगे बढ़ सकता है.

दरअसल, ग्रीस (Greece) के जाने-माने पत्रकार एंड्रियास माउंटजौरौली ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान की सहायता के लिए एर्दोगन सीरिया के विद्रोही आतंकियों को कश्मीर में भेजने की योजना पर काम कर रहा है. तुर्की के अफसरों ने इसके लिए कई आतंकी गुटों से बात भी की है. न्यूज वेबसाइट Pentapostagma पर प्रकाशित अपने आर्टिकल में एंड्रियास माउंटजौरौली लिखते हैं, 'कुछ दिन पहले ही सीरियन नेशनल आर्मी मिलिशिया के सुलेमान शाह ब्रिगेड्स के कमांडर मुहम्मद अबू इम्सा ने अपने साथियों से कहा है कि तुर्की कुछ यूनिट्स को कश्मीर में तैनात करना चाहता है. सुलेमान शाह ब्रिगेड्स को तुर्की का खुला समर्थन हासिल है, जिसका उत्तरी सीरिया के अफरीन जिले पर पूरा कब्‍जा है.'

एंड्रियास माउंटजौरौली ने लेख में यह भी लिखा है, 'सुलेमान शाह ब्रिगेड के कमांडर अबू इम्सा ने साथियों से यह भी कहा कि तुर्की के अधिकारी सीरिया के अन्य हथियारबंद गिरोहों से इस बारे में बात कर रहे हैं. गिरोह के कमांडरों से उनके नाम मांगे गए हैं, जो कश्मीर जाने के इच्‍छुक हैं. कश्मीर जाने वाले आतंकियों को 2000 डॉलर की राशि देने का भी ऑफर किया गया है. आतंकियों को बताया गया है कि कश्मीर भी उतना ही पहाड़ी है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने पुष्‍टि की थी कि तुर्की ने सीरिया में अपने सहयोगी आतंकी संगठन के लड़ाकों को काराबाख में लड़ाई के लिए तैनात भी किया था.'

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एर्दोगन सबसे बड़ा इस्‍लामिक लीडर बनने की सनक के साथ आगे बढ़ रहा है. आर्मीनिया के खिलाफ अजरबैजान की जीत से एर्दोजन का हौसला बढ़ा है और वह सऊदी अरब के प्रभुत्‍व को चुनौती दे रहा है. एर्दोगन पाकिस्तान की मदद से ग्रीस की जमीन कब्जाने का भी सपना देख रहा है और बदले में तुर्की कश्मीर पर पाकिस्तान की मदद के लिए आतंकी गुटों को कश्‍मीर भेजने के नापाक मंसूबे को अमलीजामा पहनाने की कोशिश में जुटा है.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

#gaurilankesh : मौत हो तो ऐसी

मौत हो तो ऐसी। एक मिनट पहले तक जिन्हें कर्नाटक के बाहर बहुत अधिक नहीं जाना जाता था, उन्हें मरते ही पल भर में अनंत शोहरत हासिल हो गई। जगह-जगह मातमनुमा उल्लास-उत्सव मनाया जाने लगा। पिघलती मोमबत्तियां अगाध श्रद्धांजलि का भाव पैदा करने लगीं। देश की राजधानी दिल्ली में मातमपुरसी का आयोजन कर राजनीति की रोटियां सेंकी गईं और तमाम सेलिब्रिटी ने अपने जौहर दिखाए। क्या करें भाव भले मातम का न हो, माहौल तो मातम का था न। #gaurilankesh कर्नाटक की पत्रकार की हत्या की खबरें टीवी पर कुछ यूं फ्लैश की गईं: कर्नाटक की पत्रकार #gaurilankesh की हत्या, गौरी हिन्दूवादी राजनीति की धुर विरोधी थीं और भाजपा की नीतियों का विरोध करती थीं। मेरे दस साल के कैरियर में खबर फ्लैश करने का यह नया और आधुनिक तरीका लगा। गौरी लंकेश के बारे में यही पूरी जानकारी थी और उन्हें इससे अधिक समझने का मौका न तो मानस को दिया गया और न ही पत्रकारों ने खुद इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई। मुझे भी उनके बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। लगा कि किसी महिला की हत्या कर दी गई होगी। मुझे क्या पता था कि इसमें बहुत मसाला है और इतना मसाला है कि स...

दिल्ली में हिंसा का 'सालाना जलसा'

दिल्‍ली में हिंसा अब सालाना जलसे की तरह हो गई है. पिछले साल नागरिकता कानून के नाम पर दिल्‍ली को भड़काया गया तो इस बार किसान आंदोलन के नाम पर दिल्‍ली को दहलाया गया. संभव है कि अगले साल कोई और बहाने से किसी और को आगे कर अपना उल्‍लू सीधा किया जाए. कुल मिलाकर सरकार को नवंबर के बाद सचेत हो जाना चाहिए, क्‍योंकि इसकी क्रोनोलॉजी समझना बेहद जरूरी है. वो तो खैर मनाइए कोरोना महामारी का कि दिल्‍ली का दंगा कंट्रोल हो गया, नहीं तो हम वो देखने वाले थे, जो कभी सोच भी नहीं सकते थे. ये जो तस्‍वीरें आप देख रहे हैं, वो आपको विचलित करने के लिए काफी हैं. गणतंत्र दिवस जैसे गौरवशाली दिन, जब हमें दुनिया को अपना गौरव दिखाना होता है, उस दिन को आंदोलन के नाम पर राष्‍ट्रीय शर्म बना दिया गया. एक तरफ जवान दुनिया के सामने अपना फौलादी इरादा जाहिर कर रहे थे तो दूसरी ओर, दिल्‍ली को दहलाने के लिए कुछ साजिशें कुछ कर गुजरने के लिए बेकरार हो रही थीं. तभी तो तय समय से पहले कई जगहों पर दिल्‍ली पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की खबरें आने लगीं. यह पहले से तय था कि आज का दिन भारी साबित होने वाला है, फिर भी सरकार और दिल्‍ली पुलि...

हमले अच्छे हैं!

ये कैसा इत्तेफाक है कि जिस आतंकवाद (टेररिज्म) से फ्रांस इस पूरे साल त्रस्त रहा, वहीं पर टेररिज्म शब्द इजाद किया गया था। टेररिज्म लैटिन शब्द टेरर से बना है, जिसका अर्थ भयभीत करना होता है। दरअसल फ्रांस में 1793 से 1794 के बीच के शासन को रिजिन ऑफ टेरर कहा जाता है। उस समय फ्रांस पर जैकोबिन का शासन था। उसके शासन को गाली देने के लिए तब के लोग इस शब्द का प्रयोग करने लगे। इस शब्द को और चर्चा उस समय मिली, जब 1869 में रूस के सर्गेई नेकावेव ने खुद पीपल्स रिट्रीब्यूशन की स्थापना कर खुद को टेररिस्ट घोषित कर लिया। यह वह वर्ष था, जब हमारे राष्ट्रपिता और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी पैदा हुए थे। आज टेररिज्म शब्द अंतरराष्ट्रीय पटल पर काफी मशहूर शब्द है। क्यों? क्योंकि अब शक्तिशाली और दादा कहे जाने वाले देश भी इससे भयभीत हो चले हैं। पहले उनके लिए इस शब्द का कोई अर्थ ही नहीं था, क्योंकि आतंकवादियों की पहुंच इन तक नहीं थी लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय आतंक के गुरु ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश पर भी हमला बोल दिया तब माना गया कि आतंकवाद जैसा भी कुछ होता है। विश्व बिरादरी में हाहाकार मच गय...