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अगस्त 27, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

#Nitish #Laloo से और #sharad भयभीत थे #nitish से

इधर #Nitish महागठबंधन से पीछा छुड़ाकर एनडीए में जाने का बहाना तलाश रहे थे, उधर #Sharad Yadav यादव #Nitish से भयभीत होकर अलग रास्ता अख्तियार करने में जुटे थे। दोनों की अपनी वाजिब वजहें थीं। दरअसल शरद यादव को दूसरे जॉर्ज फर्नांडीस बन जाने का भय सता रहा था। खासकर पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद से वे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे। इधर नीतीश कुमार को भी लालू के साथ काम करने में उतना मजा नहीं आ रहा था। वे खुलकर उस तरह बैटिंग नहीं कर पा रहे थे, जिस तरह एनडीए के साथ रहकर वे किया करते थे। नीतीश के साथ रहकर लालू प्रसाद यादव दिनोंदिन मजबूत होते जा रहे थे। हालांकि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और घेरेबंदी से उन पर शिकंजा कसता जा रहा था पर राजनीतिक रूप से इसका कोई नुकसान लालू प्रसाद को न होकर नीतीश कुमार को हो रहा था। उनका एमवाई (मुस्लिम+यादव) समीकरण फिर से मजबूत हो रहा था। मजाकिया अंदाज में लालू प्रसाद नीतीश कुमार पर तंज भी कस देते थे और उसे बाद में अपने हिसाब से संशोधित भी कर लेते थे। इससे वे अपने वोटरों को संदेश देने में कामयाब हो रहे थे और नीतीश की लगातार छीछालेदर ...