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अप्रैल 10, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अपने अपने #Ambedkar

ये #Ambedkar के रूप हैं या उनकी प्र‍तीक के टुकड़े। सबके अपने दावे और दलीलें हैं, सबके पास तर्क-कुतर्क है, सबके पास इतिहास की अपनी तरह की व्‍याख्‍या भी है। अच्‍छी बात यह है कि देश के कायदे-कानून बनाने वाले के प्रति सम्‍मान है और उस प्रतीक को हथियाने की होड़ है पर गलत यह है कि अंबेडकर को टुकड़ों में बांटा जा रहा है, जबकि वे एक समग्र हैं। अंबेडकर साहब कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, कम्‍युनिस्‍ट पार्टियां और अन्‍य क्षेत्रीय दलों के लिए एक साथ मुफीद कैसे हो सकते हैं। उनकी समग्रता का आलम तो देखिए कि कल पैदा हुईं और नए जमाने की राजनीति का दावा करने वाली पार्टियां भी उन्‍हें अपना बता रही हैं। सभी पार्टियों का आजकल एक ही नारा है- अंबेडकर हमारे, बाकी सब तुम्‍हारे। इस बार भारत रत्‍न बोधिसत्‍व बाबा साहब डा भीमराव अंबेडकर साहब की जयंती कुछ खास रही। सभी पार्टियों को स्‍थानीय स्‍तर तक जाकर बाबा साहब के जन्‍मदिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन करना पड़ा। ये सब अचानक नहीं हुआ। पिछले एक साल से इस पर कवायद चल रही थी। दरअसल, सत्‍ता में आने के बाद जिस तरह भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की सरकार ने हांस...