पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) जैसे दिग्गज राजनेताओं से लोहा लेते हुए राजद नेता और महागठबंधन से मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) जिस तरह सधी हुई राजनीति कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि उन्हें उनका PK मिल गया है. PK यानी प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जो पिछले चुनाव में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की चुनावी रणनीति बना रहे थे. इस बार बिहार चुनाव से PK नदारद हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि तेजस्वी यादव का PK कौन है? कौन है जो चुनावी राजनीति की बिसात पर तेजस्वी से सधी हुई चाल चलने को कह रहा है. कहीं यह खुद PK तो नहीं, PK नहीं तो मनोज झा (Manoj Jha) तो नहीं. मनोज झा इसलिए कि तेजस्वी यादव मनोज झा का बहुत सम्मान करते हैं और तेजस्वी यादव ने जब 10 लाख नौकरियां देने की बात कही थी तो मनोज झा की उसमें प्रमुख भूमिका बताई जाती है. 10 लाख नौकरियां देने के वादे के साथ ही तेजस्वी यादव ने रोजगार को बिहार में चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना दिया है, जिस पर NDA के नेता बगलें झांकने को मजबूर हो रहे हैं.
बिहार चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के बाद तेजस्वी यादव सबसे अधिक भीड़ खिचाऊं नेता साबित हो रहे हैं. नीतीश कुमार की रैलियों में तो हूटिंग होने लगी है और राहुल गांधी बिहार चुनाव में कोई छाप नहीं छोड़ पाए हैं.
बेशक जेल से ही सही, लालू प्रसाद यादव बेटे तेजस्वी को चुनावी राय जरूर देते होंगे लेकिन जिस तरह तेजस्वी फ्रंटफुट पर बैटिंग कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि उन्हें उनका PK मिल गया है. जिस तरह तेजस्वी NDA नेताओं की बातों को घुमा रहे हैं, उससे भी उनकी सधी हुई राजनीति का पता चल रहा है. नीतीश कुमार ने आठ-नौ बच्चे वाली बात की तो तेजस्वी यादव ने बड़ी चतुराई से उसे पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ घुमा दिया. बाद में तेजस्वी ने नीतीश के इस बयान को महिलाओं की अस्मिता से जोड़ दिया.
इसी तरह पीएम नरेंद्र मोदी ने एक रैली में तेजस्वी यादव को 'जंगलराज का युवराज' कहा था, जिस पर तेजस्वी ने कहा- वो देश के प्रधानमंत्री हैं और कुछ भी बोल सकते हैं. मुझे इस पर कुछ नहीं बोलना है. बाद में तेजस्वी ने कहा, बिहार के लोगों को उम्मीद थी कि पीएम मोदी विशेष पैकेज, बेरोजगारी और भूखमरी पर बोलेंगे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा.
तेजस्वी यादव की सूझबूझ का इस बात से भी पता चलता है कि वे बिहार के चुनाव में पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद, फ्रांस या किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे को हावी नहीं होने दे रहे और यह उनकी बड़ी कामयाबी है. हालांकि सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे राजद कार्यकर्ता की बांह पकड़कर झटकने की कोशिश की, जिसका वीडियो काफी वायरल हो रहा है और इसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है.
तेजस्वी यादव अपने पिता लालू प्रसाद यादव की तरह भीड़ से कनेक्ट होने की भी कोशिश कर रहे हैं. रैली में वे कहते हैं, सरकारी नौकरी मिलेगी तब न अच्छी मेहरारू मिलेगी. नौकरी होगी तब न बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का इंतजाम होगा और मां-बाप को तीर्थयात्रा पर भेजा जा सकेगा.
ये सब बातें बता रही हैं कि कोई तो है जो तेजस्वी को गाइड कर रहा है. तेजस्वी यादव भाषणों में पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला नहीं बोल रहे. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने यही रणनीति अपनाई है और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी इसी राह पर चल रही हैं. दीगर बात यह है कि इन नेताओं की चुनावी कमान PK ने ही संभाली थी. अब इन नेताओं को समझ में आने लगा है कि पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करना मतलब खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है.
हालांकि मीडिया रिपोर्ट में एक बात सामने आई है कि पिछले साल अगस्त में PK ने तेजस्वी यादव को आरजेडी के पोस्टर से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को गायब करने की टिप्स दी थी. PK का कहना था कि पोस्टर में लालू प्रसाद यादव के होने से जंगलराज चुनावी मुद्दा बन जाएगा और जवाब देना भारी पड़ जाएगा. तेजस्वी यादव की एक और रणनीति सामने आई है, वो यह कि उनकी रैली छोटे मैदानों में आयोजित की जा रही है, क्योंकि कम भीड़ होने पर भी मैदान भरा दिखे. इस तरह की रणनीति कोई काबिल रणनीतिकार ही बना सकता है.
तेजस्वी यादव को जो भी गाइड कर रहा है, अगर वो PK नहीं है तो PK से कम भी नहीं है. इस तरह PK को भी अब तगड़ी चुनौती मिलने लगी है. चुनाव में हार-जीत कुछ भी हो, पर इतना तो है कि तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार की नींद हराम कर दी है.
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