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दिसंबर 13, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं निर्भया हूं

मैं निर्भया हूं। आपकी अपनी निर्भया। सर्द रातों में वहशी दरिंदों की शिकार निर्भया। वहशीपन भी ऐसा कि क्या कहूं। खैर, मैं दुनिया से रुखसत हो गई लेकिन फिर भी आप सबके बीच हूं। दिखावे के लिए ही सही, ‘16 दिसंबर’ अब सिर्फ एक फिल्म का नाम नहीं रहा। अब यह मेरे और मेरे जैसे कितनी पीड़िताओं के साथ हुए पाप का प्रायश्चित करने का एक दिन बन गया है। आप सब कितने अपनेपन से इस दिन मुझे याद करते हैं। इसी बहाने लड़कियों की सुरक्षा के नए-नए संकल्प लेते हैं। मुझे खुशी है कि मैं हजारों-लाखों लड़कियों की सुरक्षा के उपाय करने का जरिया बन गई हूं। मैं समझती हूं कि मेरा जीवन सफल हो गया। मेरी कुर्बानी जाया नहीं गई और कुछ अच्छे कामों को पूरा करने का बहाना बन गई है। जैसा कि आप सब जानते हैं, मेरे साथ वहशीपन करने वाले दरिंदों में से तब एक नाबालिग भी था। मेरे साथ हुए पाप में वह बराबर का साझीदार था। आजकल वह  चर्चाओं में है। टीवी, सोशल मीडिया और अखबारों में अभी एक बहस चल पड़ी है। उसे छोड़ा जाना चाहिए कि नहीं। उसने जो पाप किया था, उसकी सजा तो अधिक है पर नाबालिग होने के कारण उसे सजा कम हुई और वह बाहर निकल रहा...

ये जो रावण है.....

सीता हरण ब्रह़मांड का सबसे पहला हाईटेक अपहरण कांड था। एक स्‍त्री के अपहरण के लिए उस समय के तीव्रतम पुष्‍पक विमान का प्रयोग किया गया था। आज अपहरण कितना सस्‍ता और आसान हो गया है। राह चलते आदमी को गन्‍ने के खेत में खींच लो और मीलों पैदल टहलाओ। बाइक पर बैठाकर ले जाओ। वैन से अपहरण काफी चलन में है लेकिन इस रावण ने तो अपहरण को और भी सरल करके दिखा दिया। रिक्‍शे से अपहरण, सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग रहा है पर इसका अपना अलग प्रतीकात्‍मक महत्‍व है। वो लंकेश था, लंकाधीश था, कुबेर का भाई था। दूसरी ओर यह सिर्फ और सिर्फ रावण है। यह रावण शानो-शौकत में भरोसा नहीं रखता। वैभव के नाम पर इस रावण के पास पहनावा-पोशाक के साथ रिक्‍शा और उसका चालक है लेकिन इसकी सोच जमीनी है। लंकापति रावण ने रंजिश में सीता का अपहरण किया था। उस दौरान वह दंभ में चूर था पर इस रावण के चेहरे पर दंभ नहीं है। पुष्‍पक विमान पर रावण और सीता के अलावा और कोई नहीं था पर इस रिक्‍शे पर रावण और सीता के अलावा रिक्‍शाचालक है। रिक्‍शाचालक अपना काम तल्‍लीनता से कर रहा है। रावण के चेहरे पर अपना एक भाव है पर सीता इसमें वाकई अबला नारी बन बैठी है...

झूठ की संवेदनाओं से आंसुओं का सैलाब न बहाइए

सीन एक  राज्यसभा में कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा यह कहते हुए भावुक हो जाती हैं कि गुजरात के एक मंदिर में उन्हें इसलिए नहीं घुसने दिया गया, क्योंकि वह दलित हैं। वह रो पड़ती हैं और राज्यसभा में जोरदार हंगामा होता है। क्या है सच : जिस मंदिर का जिक्र कुमारी शैलजा ने किया, वहां के विजिटर बुक में उन्होंने मंदिर की  तारीफ में कलम तोड़ दिए थे। भाजपा नेता अरुण जेटली ने इसका खुलासा किया तो न ही कांग्रेस पार्टी और न कुमारी शैलजा ने ही इसका खंडन किया। सीन दो सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मुद्दा उठाया कि असम के एक मंदिर में आरएसएस वालों ने उन्हें नहीं घुसने दिया। इस पर भी सदन में काफी हंगामा हुआ और कांग्रेस के सदस्यों ने वाकआउट कर दिया। क्या है सच :  शाम तक मंदिर के ट्रस्टी का भी बयान आ गया कि ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई है। ट्रस्टी ने यह भी कहा कि मंदिर का संचालन ट्रस्ट करता है तो इसमें आरएसएस वाले कहां से आ गए। यह नकारात्मक राजनीति है। 1800 ई. में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया थ...

कोर्ट नहीं देखता, आरोपी सोनिया हैं या सलमान

दिसंबर के दूसरे सप्ताह में कोर्ट से दो फैसले आए। दोनों हैरान करने वाले थे।  एक फैसले में गांधी परिवार की ‘संप्रभुता’ को तगड़ी चुनौती मिली थी और दूसरे में हिट एंड रन मामले में सलमान खान बरी हो गए थे। दोनों फैसलों ने इसलिए हैरान किया कि देश में गांधी परिवार के बारे में ये माना जाता है कि वो किसी भी प्रकार की कार्रवाई से उपर है। दूसरा, अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सलमान खान एकाएक कैसे बेदाग हो सकते हैं। खैर फैसले आए और छा गए। दोनों फैसलों के निहितार्थ तलाशे जाने लगे। तब तक संसद की कार्यवाही ने गति पकड़ी ही थी लेकिन कोर्ट के फैसले आने के बाद विधायिका का काम अवरूद्ध कर दिया गया। सोनिया गांधी का भी बयान आया- मैं इंदिरा गांधी की बहू हूं और मैं किसी से नहीं डरती। अगले दिन राहुल गांधी बोल पड़े - ये सारे फैसले राजनीतिक द्वेष में प्रधानमंत्री कार्यालय के दबाव में कराए जा रहे हैं। यह बयान सिर्फ एक बयान नहीं था और ऐसा बयान राहुल गांधी ही दे सकते थे। यह न्यायपालिका पर सीधा आक्षेप था। चूंकि परिवार को तगड़ी चुनौती मिली थी तो वे सुध बुध खो बैठे थे। अब चूंकि राहुल गांधी की तंग जिह्वा ने चाहे गलतबया...