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फ़रवरी 5, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चुनाव कोई वसंत ऋतु नहीं कि आमूलचूल बदलाव कर दे

आमूलचूल बदलाव के मौसम वसंत ऋतु उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में एक और बदलाव की गवाह बन सकती है। वसंत के साथ-साथ यह चुनावी मौसम भी है। इस समय नेता जनता के दर पर हैं। रैलियां चरम पर हैं। हेलीकॉप्टर धूल का गुबार उड़ाते उतर रहे हैं और कुछ ही मिनटों में नेताओं की बकैती के बाद फिर आसमानी सैर पर निकल पड़ते हैं। जिन नेताओं को आम दिनों में जिला मुख्यालयों या शहरों में आने की फुरसत नहीं मिलती, वे इस समय गांवों तक की खाक छान रहे हैं। कई ऐसे तहसील और कस्बे होंगे, जहां मुख्यमंत्री तो छोडि़ए मंत्री तक ना गए होंगे, वहां इस समय एक उड़नखटोला उड़ रहा है तो दूसरा उतर रहा है। जनता इस समय जनार्दन है और नेतारूपी भक्त मन में एवमस्तु का वरदान पाने की लालसा में खाक छान रहे हैं। तरह-तरह के जुमले वादे का रूप लेकर सामने आ रहे हैं। पांच साला इस जलसे में उलट बयार सदा से बहती चली आ रही है। एक से एक वीआईपी गाड़ियां गांवों का रुख कर रही हैं। कम-अधिक विकास के छोटे-बड़े दावों को छोड़ दें तो मतदाताओं को प्रमोशन सिर्फ इस रूप में हुआ कि वे बैलेट पेपर पर ठप्पा लगाने के बदले ईवीएम पर बटन दबाने लगे। इसके अलावा एक और...