जून के महीने में सड़ी हुई गर्मी के बीच राजनितिक हलकों में भी कुछ ऐसा हुआ, जिससे सड़ांध और बढ़ गई। अगले साल होने वाले चुनाव में अगर सपा सरकार चली जाती है तो इसमें इस जून महीने की इस सड़ांध का भारी योगदान होगा। दरअसल जून के पहले हफ्ते में ये रिपोर्ट आई कि बिसााहड़ा में अख़लाक़ के घर में जो मीट रखा था, वो गाय का ही था। इसके एक दो दिन बाद ही मथुरा बवाल में यूपी पुलिस ने तेजतर्रार एसपी मुकुल द्विवेदी समेत एसओ फरह को खो दिया। सकते में आई सरकार ने दोनों के परिजनों को 20-20 लाख रूपये मुआवज़ा देने की घोषणा कर दी। यही घोषणा और जल्दबाजी सरकार के गले की फांस बन गई। दरअसल बिसाहड़ा कांड में अखिलेश सरकार ने तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुए 45 लाख रुपये और नॉएडा में 3 फ्लैट मुफ़्त देने की घोषणा की थी। अब मथुरा कांड में अखिलेश सरकार ने जैसे ही 20-20 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की, भाजपा को बैठे बिठाये बड़ा और उसके मन के मुफीद मुद्दा मिल गया। अख़लाक़ के घर में गाय का मांस होने की पुष्टि होने पर पहले से तैयार बैठी भाजपा ने सरकार के मुआवजा देने के तरीके पर ही सवाल उठा दिया। मुकुल द्विवेदी से पहले दरोगा मनोज मिश...