आधी रात तक उधेड़बुन में था। सोच रहा था कि महीने दिन पहले जो शब्द लोग बोल नहीं पाते थे वो अचानक आम बोलचाल की भाषा कैसे हो गई? कैसे उसे लेकर ट्वीट पर ट्वीट किया जा रहा है। फेसबुक पर पक्ष और विपक्ष में पोस्टों की अचानक बाढ़ आ गई है। इस पर बहस करते लोग अपना-पराया, भाई-भाई, गुरु शिष्य परंपरा को भी भूल जा रहे हैं। एक तरह का साइबर वार चल रहा है। टीवी की बहस जिस शब्द के बिना पूरी नहीं हो रही है उस शब्द का नाम है असहिष्णुता। वाकई बहुत ही असहिष्णु शब्द है ये। सुबह इसी शब्द के साथ नींद टूटी। हाथ मोबाइल को टटोलने लगा। सोचा कि इस विषय पर कुछ न कुछ नए पोस्ट या ट्वीट आए होंगे या रात के पोस्ट पर नए रिएक्शन आए होंगे। नोटिफिकेशन की लंबी लाइन लगी थी। एक एक कर देखने लगा। हर एक टवीट और हर एक पोस्ट पर तत्काल मन में रिएक्शन उभरते चले गए। आसपास का माहौल तो सहिष्णु था। बीवी चाय लेकर सामने थी और बच्चे अठखेलियां कर रहे थे। छोटी बेटी जय जय बजरंग बली वाला गाना गा रही थी। साथ ही बजरंगी भाईजान में मुन्नी के कैरेक्टर की मिमिक्री कर रही थी पर मेरा पूरा ध्यान मोबाइल पर टिका था। पत्नी के साथ चाय की चुस्की ली। रोज की...