सीता हरण ब्रह़मांड का सबसे पहला हाईटेक अपहरण कांड था। एक स्त्री के अपहरण के लिए उस समय के तीव्रतम पुष्पक विमान का प्रयोग किया गया था। आज अपहरण कितना सस्ता और आसान हो गया है। राह चलते आदमी को गन्ने के खेत में खींच लो और मीलों पैदल टहलाओ। बाइक पर बैठाकर ले जाओ। वैन से अपहरण काफी चलन में है लेकिन इस रावण ने तो अपहरण को और भी सरल करके दिखा दिया। रिक्शे से अपहरण, सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग रहा है पर इसका अपना अलग प्रतीकात्मक महत्व है।वो लंकेश था, लंकाधीश था, कुबेर का भाई था। दूसरी ओर यह सिर्फ और सिर्फ रावण है। यह रावण शानो-शौकत में भरोसा नहीं रखता। वैभव के नाम पर इस रावण के पास पहनावा-पोशाक के साथ रिक्शा और उसका चालक है लेकिन इसकी सोच जमीनी है। लंकापति रावण ने रंजिश में सीता का अपहरण किया था। उस दौरान वह दंभ में चूर था पर इस रावण के चेहरे पर दंभ नहीं है। पुष्पक विमान पर रावण और सीता के अलावा और कोई नहीं था पर इस रिक्शे पर रावण और सीता के अलावा रिक्शाचालक है। रिक्शाचालक अपना काम तल्लीनता से कर रहा है। रावण के चेहरे पर अपना एक भाव है पर सीता इसमें वाकई अबला नारी बन बैठी हैं। उनके मुंह से कोई वकार भी नहीं निकल रहा है। चेहरे पर छटपटाहट का कोई भाव नहीं है। पति से दूर होने का कोई संताप नहीं दिख रहा है। शायद इसीलिए इस रावण को रिक्शे से आना पड़ा सीता का अपहरण करने के लिए। पुष्पक विमान से जब उस रावण ने सीता का अपहरण किया था तो पूरा ब्रह़मांड हिल गया था लेकिन यह सीता अपहरण के समय भी हया की प्रतिमूर्ति बनी हुई है।
हमें ये पता नहीं कि इस रावण के रास्ते में जटायु आएंगे कि नहीं। रास्ते में वानर सेना सीता को दिखेगी कि नहीं और वो अपना आभूषण वानर सेना के सामने गिराएंगी कि नहीं। आश् चर्य होता है कि सीता वानर सेना से मदद मांगती हैं, अपना आभूषण गिराती हैं और रावण उन्हें ऐसा करने देता है। पुष्पक विमान में जैसा कि हम टीवी में देख चुके हैं, काेई स्टेयरिंग तो होता नहीं था। फिर तो रावण को
सीता को ऐसा करने से रोकना चाहिए था। हालांकि धार्मिक तौर पर मुझे पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए ये जानना चाहता हूं कि जटायु ने एक स्त्री को बचाने की कोशिश की थी या फिर भगवान श्रीराम की पत्नी को। इनका उल्लेख करने का कारण आप मेरी कम जानकारी काे दोष दीजिएगा। सेकुलर कहकर गाली मत दीजिएगा। यह मान लीजिएगा कि मुझे जानकारी नहीं है इसलिए उलजुलूल लिख रहा है। और जो जानकारी आप दे सकें, कृपया कमेंट में डाल दीजिएगा ताकि दुबारा मैं इस तरह बकवास न करूं।
विषयांतर न होते हुए हम फिर विषय पर आते हैं। रावण का रिक्शे से आना एक भाव है, एक दर्शन है। यह रावण का राक्षसीकरण से मानवीकरण है। हालांकि महापंडित से वह राक्षसों का अधिपति कब से हो गया, इसकी जानकारी भी मुझे नहीं है। मेरी जानकारी के अनुसार, अभी जैसे फिल्मों में विलेन होते हैं, वैसे ही पहले राक्षस होते थे। इस शब्द के अनुवाद पर मत जाइएगा। मेरी भावना समझिएगा। यह वह रावण है, जिसके पास कोई गुरूर नहीं है। न लंकेश होने का, न लंकापति होने का। यह तो वो काम कर रहा है, जो इसे सौंपा गया है। इस फोटो को देखने से ऐसा लगता है कि सीता के अपहरण की सुपारी किसी और ने दी थी। यहां रावण तो सिर्फ कर्ता है। अब इसे नौकरी ही ऐसी मिली है। नौकरी में जाहिर है कई काम बिना खुद की रजामंदी के की जाती है।
बहुत ही अच्छी बात कहे हैं क्योंकि रावण आज की तारीख में किसी भी रुप में हो सकता है। क्योंकि उस समय किसी को किसी की आलोचना करने का मौका नहीं मिलता था क्योंकि इतने रेप तथा चोरी चकारी नहीं हुआ करते थे। आज आप किसी के अन्दर उसका रावण नहीं पता लगा सकते हैं क्योंकि रावण हर घर में किसी न किसी रूप में छिपा है।
जवाब देंहटाएंकुछ राम भक्तों से डरिये सर। रावण का इतना महिमामंडन ठीक नहीं
जवाब देंहटाएंआपने इसे पढ़ने के लिए समय निकाला, इसके लिए शुक्रिया
हटाएंये आम आदमी का रावण है।
जवाब देंहटाएंsita mata ke paas mike hai, lekin band hai. puspak viman ka pilot kuchh vichitra hai lekin hai. pushpak viman nahin hai lekin rikshaw hai. ye rawan lankapati nahin hai lekin rawan to hai. pata nahi kya ghalmel hai lekin ramayan to hai. jai ram ji ki
जवाब देंहटाएं