मित्रों, मन की बात यह है कि मन बड़ा परेशान है। मैं मन की बात करता गया और आपलोग अनसुना करते गए। दिल्ली और बिहार मेरे हाथ से निकल गया। विरोधियों के साथ साथ अपनों की उँगलियाँ भी उठने लगी हैं। वे उँगलियाँ भी उठने लगी हैं, जो रोटी भी नहीं उठा पातीं। इसलिए व्यथित हूँ। अब आप लोग ही मेरा साथ नहीं देंगे तो कौन देगा?
मित्रों, इस बार मन की बात को गौर से सुनिएगा। मैं रूस में था। वहां से काबुल होते हुए मुझे दिल्ली आना था। दिल्ली में वाजपेयी जी को जन्मदिन की बधाई देनी थी। काबुल में वहां की संसद को संबोधित करते हुए मैंने आतंकवाद पर इशारों में पकिस्तान को जमकर कोसा। फिर अचानक पाकिस्तान जाने का निर्णय ले लिया। संयोग से उसी दिन नवाज का जन्मदिन भी था। मई समझ सकता हूँ कि मेरे इस फैसले को लेकर क्या प्रतिक्रिया हुई होगी। क्या देश, क्या विदेश सभी हतप्रभ थे पर आपलोग तो जानते ही हैं कि इसी तरह मैंने बराक, शी और आबे को सरप्राइज़ दिया था। यह आज की विदेश नीति की मांग है। इसके परिणाम क्या होंगे, इसमें मैं नहीं जा रहा पर अटल जी की पहल को आगे बढ़ाते हुए मैंने उन्हें जन्मदिन का तोहफा देने की कोशिश की है।
मित्रों, साल 2015 जा रहा है। यह साल मैं नहीं भूल पाउँगा। साल की शुरुआत में दिल्ली तो अंत में बिहार ने मुझे चित कर दिया। मैं और मेरी पार्टी अभी तक दोनों जगह मिली हार को पचा नहीं पा रहे हैं। खैर, इस हार जीत से इतर मैं आप सभी की बेहतरी के लिए जी जान से लगा हूँ पर कुछ लोग इसमें बाधा डाल रहे हैं। निजी स्वार्थ के चलते संसद चलने नहीं दिया जा रहा है। इस कारण कई महत्वपूर्ण बिल अटके पड़े हैं। जनतंत्र पर मनतंत्र को थोपने का प्रयास चल रहा है।
मित्रों, मेरे गुजरात में पिछले दिनों पंचायत चुनाव हुए, जिसमे ग्रामीण अंचलों में मेरी पार्टी को जोर का झटका लगा, जबकि केरल में कमल खिल गया। इसी तरह मध्य प्रदेश के झाबुआ में हम हार गए और असम के उपचुनाव में जीत मिली। झारखंड के लोहरदगा सीट पर हम रिकॉर्ड मतों से हार गए। भाई लोगों, इस तरह तो हमारा मनोबल कमजोर पड़ जाएगा और हम वो नहीं कर पाएंगे, जो हम आपके लिए करना चाहते हैं। ये क्या बात हुई कि जहाँ हमारी सरकार है , वहां हम लड़खड़ा रहे हैं और जहाँ थे ही नहीं वहां आगे हो रहे हैं। थोडा सा दिल बड़ा कीजिये और फिर 56 इंच के सीने का कमाल देखिये।
एक बात और। 2015 जा रहा है तो जाने दीजिये। हम भी इसके जल्दी जाने का ही इंतज़ार कर रहे हैं। नया साल आ रहा है। नए साल में भी कई राज्यों में चुनाव होने हैं। इस नए साल में आप वादा करो कि किसी के बहकावे में नहीं आएंगे। अरे आप मुझे 60 महीने तो देकर देखो। एक माह से ही मेरे काम का हिसाब लिया जाने लगा। एक से दो, दो से तीन माह का हिसाब करते करते आपको ये सब बरगला ले गए। नए साल में अपने विवेक का इस्तेमाल करना। इसी के साथ आप सभी को नए साल की ढेर सारी शुभकामनाएं।
जय भारत
जय हिन्द
मन की बात अब एक ही आदमी का ट्रेड मार्क है
जवाब देंहटाएं