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....क्योंकि हम देश के लिए खाते हैं



हम कांग्रेस के लोग कांग्रेस को सत्यनिष्ठा से बिना किसी लाग-लपेट और स्वार्थ के संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न और कानून से ऊपर, गांधी परिवार की बपौती पार्टी मानते हैं और श्रीमती सोनिया गांधी को न सिर्फ पार्टी बल्कि देश की राजमाता और श्रीमान राहुल गांधी को युवराज घोषित करते हैं तथा यह भी तय करते हैं कि इन दोनों पर किसी तरह की क़ानूनी कार्यवाई होने पर हम देश भर विरोध प्रदर्शन करेंगे और संसद की कार्यवाही को बाधित कर देंगे, क्योंकि हम इनदोनो को कानून से ऊपर मानते हैं। हम एतद् द्वारा इस प्रस्तावना को अंगीकृत, अधिष्ठापित और आत्मार्पित करते हैं।

हम कांग्रेस के लोग सर्वसम्मति से इसी प्रस्तावना को मूल आधार मानते हैं। यह प्रस्तावना पार्टी को एक सूत्र में बांधती है। हमारी पार्टी में राजमाता या युवराज के खिलाफ बोलना राजनितिक आत्महत्या माना जाता है। विडम्बना की बात है कि देश की सबसे पुराणी पार्टी और स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका होने पर भी आज कांग्रेस के बारे में उल्टा सीधा कहा जा रहा है। आजादी की खुमारी इतनी जल्दी उतार जायेगी ये तो हम कांग्रेसियों ने सोचा ही नहीं था। मजाक था क्या एओ ह्यूम की पार्टी पर कब्ज़ा करना। गुलामी में न सही, आजादी के बाद गांधी परिवार ने एओ ह्यूम की पार्टी का कैसे देशीकरण यानी परिवारीकरण किया, किसी से छिपा नहीं है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का राज छिपाकर हम कांग्रेसियों ने देश पर कम एहसान किया था क्या? आज वही राज हमारे लिए कम से कम पश्चिम बंगाल में कफ़न साबित होता जा रहा है। उसके बाद हमलोगों ने लालबहादुर शास्त्री की मौत को भी राज बना दिया। ये तो गनीमत है कि शास्त्री जी के बेटों ने बाप की मौत की खोज खबर नहीं ली और वे कांग्रेस में रहकर भी दोयम दर्जे के सिपहसालार बने रहे।

आपातकाल के रूप में हमने देश पर राष्ट्रीय एहसान  किया था, जिसकी आजतक मजामत होती रही है और आगे भी होती रहेगी। हमने तो संविधान के प्रावधान को ही लागू किया था और प्रावधान होते ही हैं लागू होने के लिए। इसमें इतनी हायतौबा मचाने की क्या जरूरत?  इसके बाद हम लगातार सिकुड़ते गए फिर भी नहीं सुधरे। हमने अपनी नीतियों के कारन दो मजबूत नेता खो दिए। फिर भी नहीं सुधरे। कुछ लोग कहते हैं कि हम गांधी परिवार को ही क्यों नेता मानते हैं? वो तो सभी देख चुके हैं कि पार्टी ने नरसिम्हा राव को नेता माना था पर हमारे डीएनए में गैर गांधी परिवार का नेतृत्व स्वीकार करने की क्षमता है ही नहीं।

अब आप ही बताइये, नेशनल हेराल्ड केस में हमारी राजमाता और युवराज को हाइकोर्ट ने तलब कर लिया है। ये हम कैसे बर्दाश्त करेंगे? हमारी प्रस्तावना तो आपके सामने है। हम तो उसी को फॉलो करेंगे न। वैसे भी आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि गांधी परिवार और कांग्रेस देश के लिए खाते हैं। ये उचित है क्या कि इतने छोटे केस में राजमाता और युवराज को कोर्ट में पेश होना पड़े। अरे, गांधी परिवार ने देश के लिए इतनी कुर्बानियां दी है तो वो कुछ 'खाएंगे' भी तो देश के लिए ही तो खाएंगे न। इसमें इतनी हायतौबा की क्या जरूरत? कोर् और सरकार को इस बारे में जरूर सोचना चाहिए।

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