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रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा
पुरस्‍कार लौटाने दरबारी, राजमहल तक जाएगा

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#gaurilankesh : मौत हो तो ऐसी

मौत हो तो ऐसी। एक मिनट पहले तक जिन्हें कर्नाटक के बाहर बहुत अधिक नहीं जाना जाता था, उन्हें मरते ही पल भर में अनंत शोहरत हासिल हो गई। जगह-जगह मातमनुमा उल्लास-उत्सव मनाया जाने लगा। पिघलती मोमबत्तियां अगाध श्रद्धांजलि का भाव पैदा करने लगीं। देश की राजधानी दिल्ली में मातमपुरसी का आयोजन कर राजनीति की रोटियां सेंकी गईं और तमाम सेलिब्रिटी ने अपने जौहर दिखाए। क्या करें भाव भले मातम का न हो, माहौल तो मातम का था न। #gaurilankesh कर्नाटक की पत्रकार की हत्या की खबरें टीवी पर कुछ यूं फ्लैश की गईं: कर्नाटक की पत्रकार #gaurilankesh की हत्या, गौरी हिन्दूवादी राजनीति की धुर विरोधी थीं और भाजपा की नीतियों का विरोध करती थीं। मेरे दस साल के कैरियर में खबर फ्लैश करने का यह नया और आधुनिक तरीका लगा। गौरी लंकेश के बारे में यही पूरी जानकारी थी और उन्हें इससे अधिक समझने का मौका न तो मानस को दिया गया और न ही पत्रकारों ने खुद इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई। मुझे भी उनके बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। लगा कि किसी महिला की हत्या कर दी गई होगी। मुझे क्या पता था कि इसमें बहुत मसाला है और इतना मसाला है कि स...

राम मंदिर निर्माण के लिए बरस रहा पैसा

  इस समय पूरा देश राममय हो गया है. राम भक्‍ति में सराबोर देशवासियों ने मात्र 72 घंटों में 246 करोड़ रुपये दान के रूप में दिया है. छोटा हो गया बड़ा, इस दान के कार्य में अधिकांश देशवासी अपना योगदान दे रहा है. राम मंदिर के लिए हर घंटे 3.41 करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं. अगर इसे मिनट में बांटे तो एक मिनट में 57 लाख रुपये जमा हो रहे हैं.  42 दिन तक चंदा इकट्ठा करने का काम. चलेगा और इसकी रकम एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा की जा रही है. बैंकों के कुल 46000 ब्रांचों से पूरे देश को कवर किया जाएगा. 15 से 31 जनवरी तक रशीद काटकर चंदा जुटाया जाएगा. एक से 27 फरवरी तक कूपन के जरिए चंदा जुटाया जाएगा. चंदे के लिए 10, 100 और 1000 रुपये के कूपन जारी किए जाएंगे. 100 रुपये के 8 करोड़ कूपन छापे जाएंगे तो 10 रुपये के 4 करोड़ और 1000 रुपये के चंदे के लिए 12 लाख कूपन छापे जाएंगे.  विहिप और आरएसएस से जुड़े 40,00,000 कार्यकर्ताओं को दी गई है. इसके लिए 10 लाख टोली बनाई गई है, हर चार टोली पर एक कलेक्‍टर बनाया गया है, जिसकी जिम्‍मेदारी बैंक में पैसा जमा कराने की होगी. अब तक का सबसे बड़ा 11 कर...

दिल्ली में हिंसा का 'सालाना जलसा'

दिल्‍ली में हिंसा अब सालाना जलसे की तरह हो गई है. पिछले साल नागरिकता कानून के नाम पर दिल्‍ली को भड़काया गया तो इस बार किसान आंदोलन के नाम पर दिल्‍ली को दहलाया गया. संभव है कि अगले साल कोई और बहाने से किसी और को आगे कर अपना उल्‍लू सीधा किया जाए. कुल मिलाकर सरकार को नवंबर के बाद सचेत हो जाना चाहिए, क्‍योंकि इसकी क्रोनोलॉजी समझना बेहद जरूरी है. वो तो खैर मनाइए कोरोना महामारी का कि दिल्‍ली का दंगा कंट्रोल हो गया, नहीं तो हम वो देखने वाले थे, जो कभी सोच भी नहीं सकते थे. ये जो तस्‍वीरें आप देख रहे हैं, वो आपको विचलित करने के लिए काफी हैं. गणतंत्र दिवस जैसे गौरवशाली दिन, जब हमें दुनिया को अपना गौरव दिखाना होता है, उस दिन को आंदोलन के नाम पर राष्‍ट्रीय शर्म बना दिया गया. एक तरफ जवान दुनिया के सामने अपना फौलादी इरादा जाहिर कर रहे थे तो दूसरी ओर, दिल्‍ली को दहलाने के लिए कुछ साजिशें कुछ कर गुजरने के लिए बेकरार हो रही थीं. तभी तो तय समय से पहले कई जगहों पर दिल्‍ली पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की खबरें आने लगीं. यह पहले से तय था कि आज का दिन भारी साबित होने वाला है, फिर भी सरकार और दिल्‍ली पुलि...