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बुरा न मानो दिवाली है

मोदी सरकार की असहिष्णु नीतियों के विरोध में देश से लेकर विदेशों तक में आवाजें उठाई जा रही हैं। भारत में तो आधे से भी अधिक साहित्यकारों ने अपने-अपने पुरस्कार लौटा दिए हैं। फिल्मकारों और अब वैज्ञानिकों ने भी पुरस्कार लौटाने की महत्ती रस्म निभाने की कवायद शुरू कर दी है। शायर मुनव्वर राना ने पुरस्कार तो लौटा दिया पर प्रधानमंत्री कार्यालय से एक बार बुलावा आ गया तो जूता सिर पर रखने की बात करने लगे। जाहिर है पुरस्कार वे इसलिए लौटा रहे थे कि इतने बड़े शायर होने के बाद भी प्रधानमंत्री कार्यालय से बुलावा नहीं आ रहा था। बेचारे कसमसा रहे हैं कि अब कौन सा मुंह लेकर प्रधानमंत्री के सामने जाएं। लिहाजा क्षतिपूर्ति करने के लिए जूता उठाने की बात कहते फिर रहे हैं। दूसरे लोग इसलिए अभी तक नाराज हैं कि सिर्फ मुनव्वर को ही बुलावा क्यों आया, हमें क्यों नहीं आया? मुनव्वर तो जूता उठाता, हम तो बहुत कुछ उठा सकते थे। हम जो उठाते तो मुनव्वर भी शरमा जाते।



वसुधैव कुटुंबकम के जमाने में इस बात की चर्चा और इसका प्रभाव अब विदेशों में पड़ने लगा है। देश का मोस्ट वांटेड दाउद इब्राहिम ने साहित्यकारों, फिल्मकारों और वैज्ञानिकों के कदमों का अनुसरण करते हुए अंडरवल्र्ड डॉन पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। इससे अंडरवल्र्ड में सन्नाटा पसर गया है। अंडरवल्र्ड में नरेंद्र मोदी की जमकर आलोचना की जा रही है कि यह सब उन्हीं के चलते हो रहा है। दाउद के इस्तीफे की बात अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद और आईएसआई चीफ ने भी अपना पद छोड़ने की पेशकश कर दी है। अब पाकिस्तान में इस बात को लेकर तहलका मच गया है कि जब इतने महत्वपूर्ण लोग अपना पद छोड़ रहे हैं तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रहकर क्या करेंगे। वैसे भी दाउद, हाफिज और आईएसआई चीफ के बिना ये दोनों रहकर क्या कर पाते।



बात करते हैं अफ्रीकी देश दक्षिण अफ्रीका की। वहां के मीडिया और सत्ता जगत में आजकल नरेंद्र मोदी फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रपिता नेल्सन मंडेला की तुलना पंजाब के प्रकाश सिंह बादल से जो कर दी है। दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने फैसला किया है कि इस बेमेल तुलना को वे यूएन में उठाएंगे। हालांकि मौखिक रूप से यूएन महासचिव बान की मून से इस बात की शिकायत कर दी गई है। दक्षिण अफ्रीकी सरकार के इस कदम का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी स्वागत किया है। अब उम्मीद बंध गई है कि यूएन नेल्सन मंडेला और प्रकाश सिंह बादल की बेमेल तुलना को खारिज कर देगा।



उधर अमेरिका से खबर है कि वहां के राष्ट्रपति बराक ओबामा कांग्रेस में एक प्रस्ताव लाने वाले हैं। प्रस्ताव में कहा जा रहा है कि अमेरिका में नरेंद्र मोदी या उनकी पार्टी भाजपा के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दिया जाएगा। अमेरिकी सत्ता के गलियारों में इस बात की बहस गर्म है कि नरेंद्र मोदी या उनकी पार्टी अमेरिका में चुनाव लड़ती है तो फिर डेमोक्रेट या रिपब्लिकन की वैसी ही हालत हो जाएगी, जैसी भारत में कांग्रेस की हो गई है। नरेंद्र मोदी और भाजपा पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट में समझौता भी होता दिख रहा है। रिपब्लिकनों ने तो धमकी दी है कि अगर राष्ट्रपति ऐसा प्रस्ताव लाने में देरी करते हैं तो वे कांग्रेस से इस्तीफा दे देंगे। रिपब्लिकन बराक ओबामा पर मोदी के साथ दोस्ती निभाने का भी आरोप लगा रहे हैं।



सिंगापुर, थाईलैंड, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया आदि पूर्वी देशों से भी बुरी खबर है। छोटा राजन की गिरफ्तारी के लिए भारत सरकार द्वारा दबाव बनाने की बात से ये देश खफा हैं। उनका कहना है कि एक तो दाउद को भारत पकड़ नहीं पा रहा है, दूसरे उन पर छोटा राजन को पकड़ने के लिए दबाव डाला। इन देशों ने विदेश मंत्रालय से स्पष्ट रूप से बोल दिया है कि ऐसा नहीं चलेगा। दुबारा ऐसा दबाव डाला गया तो सभी देशों के शासनाध्यक्ष इस्तीफा दे देंगे। उनका तर्क है कि नरेंद्र मोदी सरकार को प्रेशर में लाना है तो इस्तीफा देना ही एकमात्र विकल्प है। भारत में यह प्रयोग काफी हद तक सफल साबित हो रहा है।



विरोध की खबरों के बीच नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक सुखद खबर भी है। सनी लियोन ने नरेंद्र मोदी की नीतियों का बचाव करते हुए कहा है कि वे इतना अच्छा काम कर रहे हैं। इसलिए उनके समर्थन में वे निर्वस्त्र होकर प्रचार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि पूनम पांडे भारत को वल्र्ड कप में जिताने के लिए निर्वस्त्र हो सकती हैं तो वे भारत का नाम ऊंचा करने वाले प्रधानमंत्री के पक्ष में निर्वस्त्र तो हो ही सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसका कोई गलत और निरर्थक अर्थ न लगाया जाए नहीं तो वे इसे निजता का उल्लंघन मानेंगी और कानूनी कार्रवाई भी कर सकती हैं।

टिप्पणियाँ

  1. waise sunny ki khabar ke baad ye aur pata karna chahiye ki manforce wale kya karne ki tayyari kar rahe hain.
    ajay kaushik

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  2. chota rajan ki waapsi bahut badi safalta hai....

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  3. सुनील जी शानदार लिखा है, जो बुरा माने वो.....जाए.......

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  4. जब सोने को तेज आंच पर चढ़ाया जाता है तो अवशिष्ट पदार्थ अपने आप उड़ जाते हैं। उन्हें कहना नहीं पड़ता। तेज आंच के कारण उत्पन्न बेचैनी उन्हें भागने पर मजबूर कर देती है। गाहे-बेगाहे जोड़-तोड़ या संयोग-दुर्योग से पुरस्कार पाने वालों की भी कमोवेश यही हालत है। विषय काफी गंभीर है लेकिन इसका व्यांगिक चित्रण उतना ही दमदार। भाषा सरल और प्रवाहयुक्त होने के कारण पठनीय है।
    अरविंद ओझा

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