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सियाचिन के हनुमान


बेवफा हुआ सियाचिन का मौसम
बर्फ की चादर कब्र बन गई
कब्र से जिन्दा निकले हनुमंथप्पा
दुनिया की आँखें फटी की फटी रह गईं

देश ने दवा की, देशवासियों ने दुआ
जान की भीख मांगने निकलीं माँ, बहन व बुआ
कैसे बचते 'हनुमान' जब कुदरत ही बेवफा हो गए

सियाचिन तो बचा लेंगे हम
दुश्मन की छाती पर चढ़ लेंगे हम
पा लेंगे विजय कोहराम मचाकर
मगर राम से 'हनुमान' तो बेवफा हो गए

जीवाश्म छोड़ चले 'हनुमान' भले ही
पर बताओ कब 'हनुमान' मरे हैं
'हनुमान' अजर हैं, अमर हैं
दिल में हैं 'हनुमान', मन में हैं 'हनुमान'

बोलो जय जय जय हनुमान
बोलो जय जय जय हनुमान



रचयिता: सुनील मिश्र 'सुनील'


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